Tuesday, December 27, 2011

तेरे बिन.........................!


ज़िन्दगी क्या है तेरे बगैर, ये न समझ सके कभी हम,
अब तो बस एक उम्मीद बची है और थोडा सा है गम, 
हर एक सांस अब भी आती है तेरी उम्मीदों के साथ,
पर तेरे इंतज़ार में जाने क्यों ज़िन्दगी लगती है कम!

कुछ अनकहे से जज्बात रह गए अब दिल के वीराने में,
कुछ अनबुझे से हालात बन गए अपने इस अफ़साने में,
मेरा प्यार तू समझ ना पायी या कमी रही समझाने में,
देख कही ये उम्र ना गुजर जाये यूँ ही मुझे आजमाने में!

तेरे बिन.........................!


हमने तो हर सांस गुजारी है उनकी ही चाह में,


वो तो बस मशगुल रहे अपने ही परवाज में,

उम्र भर की सुबह गुजारी हमने उन्हें मनाने में, 

शाम को वो रूठे भी तो अपने ही अंदाज़ में!


कैसे उन्हें हम समझाए उनके बिना अधूरे है, 

जीवन के हर रंग बेगाने उनके दूर हो जाने से,

हर लम्हा तड़पाता है जो साथ गुजारा था उनके, 

वो तो बस खुश है अपने घरौंदे बनाने में!"



"जब काली काली रातो में नींद न आये, 

क्या करे ये तनहा दिल कोई तो बताये!

बस थोडा सा प्यार ही मांगा था उनसे, 

जो मिला हमे वो कोई दुश्मन भी ना पाए!



अब तो बस आँशु है शिकवे है, आहे है, 

सुनी इन रातों में बस तेरी ही यादो के साये है,

ज़िन्दगी बस तेरी मेहरबानियो से सजी, 

कुछ पल तेरी चाह रही बाकि तेरी ही यादे है!
"

ज़िन्दगी क्या है तेरे बगैर, ये न समझ सके कभी हम,
अब तो बस एक उम्मीद बची है और थोडा सा है गम, 
हर एक सांस अब भी आती है तेरी उम्मीदों के साथ,
पर तेरे इंतज़ार में जाने क्यों ज़िन्दगी लगती है कम!

कुछ अनकहे से जज्बात रह गए अब दिल के वीराने में,
कुछ अनबुझे से हालात बन गए अपने इस अफ़साने में,
मेरा प्यार तू समझ ना पायी या कमी रही समझाने में,
देख कही ये उम्र ना गुजर जाये यूँ ही मुझे आजमाने में!