ज़िन्दगी क्या है तेरे बगैर, ये न समझ सके कभी हम,
अब तो बस एक उम्मीद बची है और थोडा सा है गम,
हर एक सांस अब भी आती है तेरी उम्मीदों के साथ,
पर तेरे इंतज़ार में जाने क्यों ज़िन्दगी लगती है कम!
कुछ अनकहे से जज्बात रह गए अब दिल के वीराने में,
कुछ अनबुझे से हालात बन गए अपने इस अफ़साने में,
मेरा प्यार तू समझ ना पायी या कमी रही समझाने में,
देख कही ये उम्र ना गुजर जाये यूँ ही मुझे आजमाने में!
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